डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल का साहित्यिक परिचय एवं जीवन परिचय (Vasudev Sharan Agrawal Biography)


डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल का साहित्यिक परिचय एवं जीवन परिचय (Vasudev Sharan Agrawal Biography)


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जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियां

भारतीय संस्कृति और पुरातत्व के विद्वान वासुदेवशरण अग्रवाल का जन्म वर्ष 6 अगस्त 1904 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के खेड़ा नामक ग्राम में हुआ था। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद एम. ए. , पी. एच. डी. तथा डी. लिट्. कि उपलब्ध कि उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की। इन्होंने पाली, संस्कृति और अंग्रेजी आदि भाषाओं एवं उनके साहित्य का गहन अध्ययन किया। ये काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारती महाविद्यालय में ‘पुरातत्व एवं प्राचीन इतिहास विभाग' के अध्यक्ष रहे। वासुदेव शरण अग्रवाल दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय के अध्यक्ष रहे। हिंदी की इस महान विभूति का वर्ष 1967 में स्वर्गवास हो गया।


डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल साहित्यिक सेवाएं


इन्होंने कई ग्रंथों का संपादन व पाठ शोधन की भी किया। जायसी के ‘पद्मावत’ की संजीवनी व्याख्या और बाणभट्ट के हर्ष चरित्र का संस्कृतिक अध्ययन प्रस्तुत करके इन्होंने हिंदी साहित्य को गौरववंती किया। इन्होंने प्राचीन महापुरुषों - श्री कृष्ण, बाल्मीकि, मनु आदि का आधुनिक दृष्टिकोण से बुद्धि संगत चरित्र चित्रण प्रस्तुत किया।


वासुदेव शरण अग्रवाल का रचना (कृतियां)


डॉ अग्रवाल ने निबंध रचना, शोध और संपादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनकी प्रमुख रचनाएं निम्न लिखित हैं।

1. निबंध संग्रह - पृथ्वी पुत्र, कल्पलता, कला और संस्कृति, कल्पवृक्ष, भारत की एकता, मातृभूमि, वाग्धारा आदि।

2. शोध - पाणिनिकालीन

3. संपादन – जायसी कृत पद्मावत की संजीवनी व्याख्या, बाणभट्ट के हर्ष चरित्र का संस्कृतिक अध्ययन। इसके अतिरिक्त इन्होंने संस्कृत, पालि और प्राकृत के अनेक ग्रंथों का भी संपादन किया।


वासुदेव शरण अग्रवाल की भाषा शैली


डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल की भाषा शैली उत्कृष्ट एवं पाण्डित्यपूर्ण है। इनकी भाषा शुद्ध तथा परिष्कृत खड़ी बोली है। इन्होंने अपनी भाषा में अनेक प्रकार के देशज शब्दों का प्रयोग किया है, जिसके कारण इनकी भाषा सरल, सुबोध एवं व्यवहारिक लगती है। इन्होंने प्रायः उर्दू, अंग्रेजी आदि की शब्दावली, मुहावरों, लोकोक्तियों का प्रयोग नहीं किया है। इनकी भाषा विषय के अनुकूल है। संस्कृतनिष्ट होने के कारण भाषा में कहीं-कहीं अवरोध आ गया है, किंतु इससे भाव प्रकट में कोई कमी नहीं आई है। अग्रवाल जी की भाषा शैली में उनके व्यक्तित्व तथा विद्वता की सहज अभिव्यक्ति हुई है, इसलिए इनकी शैली विचार प्रधान है। इन्होंने गवेषणात्मक, व्याख्यात्मक तथा उद्धरण शैलियों का प्रयोग भी किया है।


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प्रश्न - 1. वासुदेव शरण अग्रवाल का जन्म कब और कहां हुआ था।

उत्तर - वासुदेव शरण अग्रवाल का जन्म 6 अगस्त 1904 ई० में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के खेड़ा नामक ग्राम में हुआ था।

प्रश्न - 2. वासुदेव शरण अग्रवाल की मृत्यु कब हुई।

उत्तर - वासुदेव शरण अग्रवाल की मृत्यु 1967 में हुई।


प्रश्न - 3. वासुदेव शरण अग्रवाल द्वारा लिखित कृति कौन सी है।

उत्तर - वासुदेव अग्रवाल की प्रमुख कृतियां निम्नलिखित हैं।

पृथिवी पुत्र, कला और संस्कृति, भारत की एकता, माता भूमि, कल्पलता इत्यादि

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